Thursday, June 23, 2022

किरन अग्रवाल, प्रतापगढ़, यूपी

  नश्वर काया

जीवन का सत्य यही है बस।

 इसको तो एक दिन जाना है।

काफी तेजी से बीत गया।

जो बचा हुआ है अब उसको।

प्रभु भक्ति में ही लगाना है।

चाहें अनचाहे रिश्तों को, अब।

प्रेम से हमें निभाना है।

जो बीत गया वो अच्छा था।

जो बीत रहा वो भी अच्छा।

आगे कैसे बीतेगा यह।

इसकी हम सब को खबर कहां।

जाना है एक दिन हम सब को,

प्रभु के पावन चरणों में ही।

यह सत्य नहीं बदलेगा कभी।

एक दिन हम सब की बारी है।

कुछ ऐसा करके  गुजरना हैं।

यादों में जिंदा रह जाये।

इस माटी के पुतले को तो।

एक दिन माटी में मिलना है।

अब जाग मुसाफिर भोर हुई।

प्रभु भक्ति में खो जाना है।

वो पार लगा देगा सबको।

चरणों में समर्पित होना है।

क्षण भंगुर सारे रिश्ते हैं।

हमें समय का मोल चुकाना है।

जब तक ये शाशें बचीं हुईं।

जीवन का कर्ज चुकाना है।

हे राम,हे राम, हे राम


किरन अग्रवाल, प्रतापगढ़,  यूपी

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