भरा आकाश और नव मंडल
बारूद और धुएं की बौछार है
सिसक रही मानवता
यह कैसा नरसंहार है
जहां थी तारों की लड़ियां
वहां बमों की भरमार है
कांप रहा नभ मंडल सारा
यह कैसा अत्याचार है
खोज ली बेटी ने जीवन बचाने की औषधि
पर क्यों पिता का युद्ध व्यापार है
बेबस बच्चे भूखे प्यासे
मां बाप भी लाचार हैं
क्यों चली गई इंसानियत
क्यों हैवानियत का ही राज है
बातें से कर सकते थे सुलह जहां
बेकार ही किए संहार है
नर कंकालों से भर गई धरती
पर फिर भी ना बदला उनका व्यवहार है
*पूनम सराफ*
*सचिव*
*रानीगंज शाखा*"