✏️ मां
आज सपने में मां आई थी
बोली कुछ नहीं बस मुस्कुराई थी
सोचा अपनी आपबीती सुनाऊं
जीवन की उथल पुथल बतलाऊं
जब तुम पास थी मेरे , मैं तुम्हें समझ नही पाई
आज जब खुद मां बनी ,तब तुम्हारी याद आई
कैसे करती थी तुम मुझे भी सिखाना
खुद को भुला कर जिंदगी बिताना
बच्चों की परवरिश मां का फर्ज होता है
आज समझी कि वो एक कर्ज होता है
अब मुझे भी ये कर्ज चुकाना है
अपने बच्चों के सुखद भविष्य का आधार बनाना है
जानती हूं कभी तुम अब वापस नही आओगी
मुझसे तो बस अब सपनों में ही मिल पाओगी
पर वो मां है सब जान गई
बेटी का दर्द पहचान गई
फिर माँ ने मुझको गले लगाया
तो इस बात पे यकिं आया
कि दुनिया में इतना सुकून कहीं नहीं है
अगर स्वर्ग है कहीं तो बस यहीं है यहीं है 💔😞🤱
झारखंड, जमशेदपुर, ऋतू नागेलिया