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Saturday, June 25, 2022

तारा अग्रवाल औरंगाबाद सिडको

 "पाती"

उफ, जितना भुलाती हूं मां को उतना ही ज्यादा याद "आती" ~~~

थाम कलम मै बैठ गई हूं लिखने को पाती~~

 

मां के पावन प्रेम से, अखियां भर भर आती। होकर स्नेह विभोर मैं लिखने बैठी पाती।

 

गौरव महसूस करती हूं चरणों में शीश झुका कर

 

मन मयूर बन नाच उठा है,

स्नेहाशीष को पाकर।

 

जीवन के हर क्षण के बीच

खुशी की नई

कई ~~

कडी जुड़ जाती।

 

मां आपसे ही अपनापन पाया

अपना मन उसमें ही है समाया

बनो प्रेरणा साथ रहो *तुम जैसे हो मेरी छाया

बस सोच रही हूं केवल इतना

 क्या प्रण पूरा कर पाएंगी ?

मेरी दर्द भरी पाती!

 

तारा अग्रवाल

औरंगाबाद सिडको