बहुत कुछ बदल रहा है
बहुत कुछ बदलना
अभी बाकी है।
उड़ना तो हमने सीख लिया
पर आसमाॉ छूना
अभी बाकी है।
रंग, जो फीके पड़ गए थे
जिंदगी के
उन्हें चमकाना
अभी बाकी है।
हसरतें, जो मन की रह गई थी अधूरी
उन्हें पूरी करना
अभी बाकी है।
सबको खुश रखना तो सीख लिया
खुद को खुश करना
अभी बाकी है।
बहुत कुछ सुन लिया
अब थोड़ा कहना
अभी बाकी है।
आधी जिंदगी तो गुजर गई
पर खुल कर जीना
अभी बाकी है।
मां ,पत्नी ,बहन ,बेटी
तो बन गई
पर खुद की पहचान
अभी बाकी है।।
मनीषा अग्रवाल
सिवनी मालवा
नर्मदा पुरम मध्य प्रदेश