कुछ विषय मन को भाया,
संस्कार शब्द दिमाग़ में आया,
कुछ जाना पहचाना सा था,
भूला बिसरा खोया सा था,
माँ ने शायद कुछ बतलाया था,
बड़ो का सम्मान सिखाया था,
जल्दी उठने का फ़र्ज़ समझाया था
पूजापाठ का एक जगह बताया था,
दानधर्म भी हाथों से करवाया था,
सेवा भाव की आदत भी डाली थी,
त्याग की भावना से नहलाया था,
ज़िंदगी का यही है पूर्ण ज्ञान पढाया था,
सारी बातें आँखों के सामने आया था,
ज़िन्दगी की आप धापी में जिसको भुलाया था,
आज अपने अंदर कहराते हुए पाया था,
इस बगिया को फिर से सीचने को मन ललचाया है
अब संस्कार शब्द पुरे वजूद में छाया है!!!!
कविता पोदार, पटना सिटी बिहार
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