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Saturday, April 23, 2022

पूनम अग्रवाल, गोलाघाट, असम

 चल अकेला.... चल अकेला.....

हे मानव तू चल अकेला ,चल अकेला,

दुनिया में भीड़ बहुत है और लगा है बेबसी का रेला,

बेहतर है कि .....तू चल अकेला ,चल अकेला ,चल अकेला,

निडर बन ,निस्वार्थ बन,ईश्वर की इबादत कर,

सच्चाई की डगर पर चल,

कर्म को  अपनी पहचान बना,

जिंदगी बढ़ती रहेगी , कारवां चलता रहेगा,

न जीत की परवाह कर, न हार  से  तू डर,

खुद पर यकीन कर, आगे बढ़... आगे बढ़....

हौसला अगर बुलंद हो ,तो मंजिल भी नजदीक मिलेगी,

बस मेहनत कर ,खून - पसीना एक कर,

सूर्य  की ताप में जलना पड़े तो जल,राह में अगर कांटे बिछे हो तो भी चल,

दुखों के बादल को गरजने दे,आंसुओं के सैलाब को बहने दे,

केवल अपने दृढ़ संकल्प पर अमल कर,

 समय का सम्मान कर,समय की गति संग बहता जा,

आगे बढ़ता जा .....आगे बढ़ता जा....

तेरी मेहनत जरूर रंग लाएगी....सफलता तुझे  जल्द ही गले लगाएगी.....

हे मानव... तू चल अकेला, चल अकेला!!

 

"  वृद्धावस्था वरदान है!!"

जन्म से मरण तक का आखिरी पड़ाव वृद्ध अवस्था कहलाता है I

जीवन के हर उतार-चढ़ाव भरे संघर्ष को बखूबी दर्शाता है l

उच्च विचार, सुदृष्टि, मधुर वाणी की आवश्यकता समझाता है l

भक्ति भाव ,प्रेम, अच्छे संस्कार से नव पीढ़ी को अवगत कराता है l

वृद्ध अवस्था के अंतिम चरण में बचपन फिर लौट आता है l

सांसारिक चकाचौंध नहीं ,दो मीठे बोल,दो सुनहरे पल अपनों के साथ,यही इनका दिल चाहता है l

वृद्ध अवस्था कोई अभिशाप नहीं,

यह तो एक अमूल्य ईश्वरिक  वरदान है l

वृद्ध  परिजन हमारे घर की शान है l

जिनके घर होती इनकी सेवा ,वह केवल घर नहीं, 

एक दिव्य तीर्थ स्थान है .......

एक दिव्य तीर्थ स्थान है!!


पूनम अग्रवाल, गोलाघाट, असम