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Saturday, June 25, 2022

सौ संगीता संजय चौधरी हिंगोली महाराष्ट्र

 

वसुंधरा🌎

पृथ्वी  रूप हैं वसुंधरा

जिससे जीवन हराभरा

करती हूं सभी का लालन पोषण,,,,

चंद भौतिक सुखों के खतिर

मेरे लाल क्यों कर रहे हो मेरा पतन।,,,,

मेरे ही गर्भ से तुम्हे मिले नीर

अगणित धातु ओर हीर,,,

पेड़ पौधे पशु पक्षी ओर मानव,,

सभी को मिलता मुझसे जीवन,,,

पर मेरे लाल क्या,, कर्ज चुका रहा है तू ,,,कर के मेरा पतन,,,

राष्ट्र -राष्ट्र के शत्रुत्व में

शस्त्र-अस्त्रो का तुम मुझ पर करते हो प्रहार,,,

कई घाव देकर नष्ट कर देते हो मेरा साज श्रृंगार,,,

आज यह माँ करती है अपने बच्चों से गुहार,,,

मत काटो पेड़ पौधों को,,,

ना नष्ट करो खेत खलियान,,,

मेरे ही गर्भ से मिला तुम्हे जीवन,,,वैसे ही मेरे पतन से निश्चित है तुम्हारा भी पतन,,,,

एक दिन के वसुंधरा दिन से ,,,क्या मिल जायेगा मुझे मेरा साज श्रृंगार,,???

पर यह निश्चित कहती हूं में,,,

एक पेड़ लगाकर,जल ऊर्जा की बचत कर,,स्वच्छ ता को अपनाकर ,,,

सेंद्रिय खेती कर,,,,मुझसे करोंगे हर पल प्यार,,,

फिरसे महकूँगी में कर साज श्रृंगार,,, 

फिर यह वसुंधरा हमेशा रहेंगी सुजलाम सुफलाम,,,,

(22 अप्रैल वसुंधरा दिवस निमित्त यह शब्द भाव वसुंधरा के लिए)

✒️सौ संगीता संजय चौधरी

महाराष्ट्र हिंगोली