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Saturday, April 23, 2022

कविता अग्रवाला शिवसागर, असम

 "शीर्षक - कबूतर


रोज सवेरे जब मैं उठती

पहले इनको दाना देती। 

शांति दूत उड़-उड़ कर आते

चुग-चुग कर दाना खाते। 

नहीं ईर्ष्या एक दूजे से 

अपने-अपने हक़ का खाते।


कितने सुंदर कितने प्यारे

मासूम से जीव ये सारे।

कुछ सफेद कुछ हैं काले

आँखें हरपल इन्हें निहारें।


नर कर मन में तनिक विचार 

क्यों इनको तुम मार गिराते।

अपने एक निवाले खातिर

क्यों बन जाते तुम कातिल।

मेल-जोल प्रेम भाईचारा 

कुछ तो सीखो तुम भी इनसे। 


कविता अग्रवाला

शिवसागर, असम"

9101641304