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Tuesday, April 19, 2022

बिमला सर्राफ, पूर्णिया, बिहार प्रदेश

कितनी सुंदर प्रकृति हमारी, मगर हो रहा इसका विनाश | 

कट रहे हैं पेड़-पौधे, और हो रहा हरियाली का नाश || 

प्रकृति पर होता सित्तम, हमसे सहा नहीं जाता है| 

पर्यावरण के नष्ट होने से, वातावरण दूषित हो जाता है || 

नदियों, तालाबों, जंगलों और झरनों की हमको रक्षा करनी है| 

चारों ओर हरियाली फैलाकर, धरती सुरक्षित रखनी है|| 

जीवनदायिनी धरा की, अहमियत सबको समझाना है | 

विश्व में फैले वायुमण्डलीय प्रदूषण को मिटाना है || 

औद्योगिकरण के इस युग में, हिमनद सारी सुख जाएगी | 

तपती हुई धरा के विस्फोट से, प्रकृति नहीं बच पाएगी || 

पर्यावरण के महत्व को, हमको समझना होगा | 

प्राकृतिक साधनों के होते हुए, हनन को रोकना होगा।। 

प्रकृति का शृंगार है हरियाली, 

हरियाली ही हमारे जीवन में लाएगी खुशहाली। 


भारतीय संस्कृति


अनेकानेक उत्कृष्ट गुण हैं विद्यमान, 

भारतीय संस्कृति है बड़ी महान |


आध्यात्मिकता एवं भौतिकता का, 

विशिष्ट समन्वय है इसमें, 

त्याग , तपस्या, मोक्ष और कर्तव्यनिष्ठा

का पूर्ण समावेश है इसमें |


एकता, उदारता, सहनशीलता और, 

गतिशीलता कूट कूट कर भरी है। 

प्राकृतिक-प्रेम, सहिष्णुता और, 

समानता की सच्ची परिचायक है।। 


कल्याणकारी भावनाओं वाली संस्कृति,

मनुष्य और समाज के संबंध का आदर्श है। 

वैदिक साहित्य, संगीत , कला और

नारी सम्मान के लिए विख्यात है। 


ग्रहणशीलता और वैदिक परम्पराओं से जुड़ी हुई, 

विश्व की समस्त संस्कृतियों में श्रेष्ठतम है।

है सदैव प्रगतिशील रहनेवाली संस्कृति, 

बड़ी विलक्षण है हमारी भारतीय संस्कृति।।  

बिमला सर्राफ,

पूर्णिया, बिहार प्रदेश

8969828969