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Saturday, May 28, 2022

झारखंड, जमशेदपुर, पुष्पा संगी

 किताब

 

गुरुओं की गुरु है यह,

आचार्यों की है आचार्य।

हर एक को दिया है ज्ञान,

चाहे आर्य हो या अनार्य।


जीवन मार्ग करती है प्रशस्त

टूटता मनोबल करती है सशक्त,

अज्ञान के तम में दिया है,

भ्रांति को यथार्थ सेजिया है।


रूढ़िवादी दासता से दिलाती है मुक्ति,

कैसी भी हो उलझन, देती है युक्ति।


फूलों सी कोमल ता, इत्र सा पसराव।

बूझो तो कौन???


जीवन की सच्ची साथी किताब मैं किताब।


झारखंड, जमशेदपुर, पुष्पा संगी