धरती का इठलाता आंगन, क्यों फैलाया यहां प्रदूषण।
धरती का इठलाता आंगन, क्यों फैलाया यहां प्रदूषण।
शस्य श्यामला था जो यौवन,छेड़छाड़ किया पर्यावरण।
वृक्ष काट वन खूब जलाएं, खनिज खनन, पर्वत भी काटे।
क्यों प्रकृति विकृत किया मनु तू , क्यों बेदर्द जलाशय पाटे।
हो सपूत यदि धरती मां के,इसकी लाज बचाना होगा।
प्रदूषण हीन रहे भू माता, इसलिए
वृक्ष लगाना होगा
चलो हमारी धरती मां को, फिर उसकी नव निधि लौटायें।
पेड़ कोई कटने ना पाए , जंगल भी घटने ना पाए।
कहीं धरा मरु नहीं बन जाये,पेड़ लगाएं और लगवायें,
फिर आने वाली पीढ़ी को,अक्षय धरा, रिद्धि सिद्धि लौटायें।
वीणा खंडेलवाल
तुमसर महाराष्ट्र