"*निर्मल धरा*
*बूंद बूंद से धारा बनती बूंद से ही बुझती प्यास*
*अपनों के खातिर आज से ही जल बचाने का करना होगा हमें प्रयास*
*तपता सूरज तपती धरती और उजड़ी हरियाली यह करा रही एहसास*
*पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ पेड़ से ही मिलती हम को ठंडक और जीवन को सांस*
*सबसे पहले करें दिमाग की सफाई और रखें अपने सफाई आसपास*
*सौर्य ऊर्जा के प्रति जागरूकता लाकर हर घर-घर में फैलाएं प्रकाश*"
ऋतू अग्रवाल, सृजन शाखा, कटक उड़ीसा