वायरस
रिश्ते नाते प्यार के सब
दरवाजे गुम से हो गए है
कोरोना के इस दौर मे सब
रास्ते सुन से हो गए है
न जाने कब? दूर दराज बैठे रिश्तो से ऑखे तार तार होगी
कब इस कोरोना रुपी भॅवर
से नौका पार होगी?
ताली बजाओ, दीप जलाओ से लेकर,
हर एक उसके आदेशो को सर
ऑखो पे संभाला है। मोदी जी को हमने अपना तारण हार माना
है।
न कहीं आना, न कहीं जाना, न ही हाथ मिलाना है
कोरोना के भय से ही सही, भारतीय संस्कृति को फिर से पूरे जग ने जाना है।
आओ सब मिलकर प्रण करे,हमारी संस्कृति को फिर से जगाना है
पश्च्यात संस्कृति को भूलकर, भारतीय संस्कृति को अपनाना है।
जय भारत
स्व रचित-
चंचल
अग्रवाल
स्नातकोत्तर, पीजीडीसीए पूर्व शिक्षिका
जुनागङ उङिसा 9556204869