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Wednesday, April 27, 2022

अनु शर्मा, शिवसागर, असम

 """ आत्मविश्वास ""

 ‌हम वो परिंदे नहीं जो उड़ना छोड़ देंगे

    ये आसमां छिन गया तो क्या हुआ नया ढूंढ लेंगे 

    ये पारावर छुट गया तो क्या हुआ नया सागर ढूंढ लेंगे 

    हम वो कश्तियां नहीं जो तैरना छोड़ देंगे

    कदम चलते रहेंगे जब तक श्वास है

    परिस्थिति से परे स्वयं पर हमें विश्वास है

    एक रास्ता नहीं मिला तो क्या हुआ एक नयी राह ढूंढ लेंगे 

   हम वो मुसाफिर नहीं जो चलना छोड़ देंगे 

  नशा हमें हमारी फितरत का हर हार करती है बुलंद इरादा जीत का 

   ये मुकाम हासिल नहीं किया तो क्या हुआ नये ठिकाने ढूंढ लेंगे 

    हम वो परिंदे नहीं जो उड़ना छोड़ देंगे 

     हम हमारे आत्मविश्वास को झुकने नहीं देंगे 

         हम वो परिंदे नहीं जो उड़ना छोड़ देंगे 

                       


शीर्षक- नारी शक्ति  

 

मैं नारी हूं ! मैं नारी हूं ! 

मैं राष्ट्र की शक्ति और भक्ति हूँ। 

               

अद्भुत है मेरा हरेक रूप  

कभी मां दुर्गा तो कभी मैं काली हूं। 

               

मेरी हरेक सोच अलग है

कभी सरल तो कभी कठोर हूँ। 

          

मैं मतृत्व संजोए माँ हूँ 

कभी बहू तो कभी बेटी हूँ। 

              

मैं कभी किसी का दर्द

तो कभी ममता और त्याग हूँ। 

              

मैं चमकीली तलवार हूँ 

तो कभी आंधी तुफां की धार हूँ। 

          

मैं अभिमान और हिम्मत हूँ

तो कभी परछाईं बन जाती हूँ। 

  

हरेक दिन हरेक रूप हूँ 

मैं कभी छांव तो कभी धूप हूँ। 


कुछ सपने कुछ उम्मीदें हूँ     

कुछ दिल में अरमान रखती हूँ। 

         

मैं बलिदान की मूर्ति हूँ 

कभी ना डरी कभी ना हारी हूँ। 

मैं सब कुछ सुनती हूँ

अपने अस्तित्व को पहचान हूँ। 

मैं आस्था,प्रेम,विश्वास हूँ

कोमल हूँ कमजोर नहीं हूँ। 

जीव का निर्माण हूँ 

राष्ट्र का मान-सम्मान अभिमान हूँ। 

मैं नारी हूं ! मैं नारी हूं ! 

मैं राष्ट्र की शक्ति और भक्ति हूँ। 


अनु शर्मा 

शिवसागर, असम