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Saturday, May 28, 2022

झारखंड, जमशेदपुर, मीना अग्रवाल

 "" जिंदगी ""


जिंदगी से बड़ी, कोई सजा ही नहीं,

और क्या जुल्म है, कुछ पता ही नहीं।

इतने हिस्सों में ,बट गई हूं मैं ,

मेरे हिस्से में तो , कुछ बचा ही नहीं ।

जिंदगी से बड़ी  ,कोई सजा ही नहीं ,

और क्या जुल्म है, कुछ पता ही नहीं ।

चाहे सोने के फ्रेम में , जड़ दो ,

"आईना" झूठ , बोलता ही नहीं ।

जिंदगी से बड़ी , कोई सजा ही नहीं ,

और क्या जुल्म है, कुछ पता ही नहीं ।

धन के हाथों , बिक गए हैं सभी ,

अब किसी जुल्म की , कोई सजा ही नहीं ।

जिंदगी से बड़ी , कोई सजा ही नहीं ,

और क्या जुल्म है , कुछ पता ही नहीं ।

सच घटे या बड़े, तो सच-सच ना रहे ,

"यारो" - झूठ की तो कोई ," इंतेहा " ही नहीं, इंतेहा ही नहीं 

जिंदगी से बड़ी , कोई सजा ही नहीं ,

और क्या जुल्म है ,कुछ पता ही नहीं ।। 


झारखंड, जमशेदपुर, मीना अग्रवाल