आज की नारी
आज नारी को आसरा नहीं,साथ चाहिए
खामोशी नहीं,सुलक्षी सी एक बात चाहिए
अब वो पर्दे के पीछे की आन नहीं,घर की शान है
निकली है वो सपनों को पाने के लिए,लक्ष्य तक ले जाने वाला एक साथ चाहिए
आज नारी को आसरा नहीं एकसाथ चाहिए
अपनी व्यथा न कहकर, छुप छुप कर रोने के दिन बीत गये,
सबके दिलों को चीर कर रखने वाली बुलन्द आवाज चाहिए
आज नारी को आसरा नहीं,साथ चाहिए
अब बिना पंखों के हीं सही,न रुकने वाली उड़ान चाहिए
देवी नहीं बनना चाहती वो
बस उसे तो अपनी पहचान चाहिए।
आज नारी को आसरा नहीं साथ चाहिए।
राज खंडेलवाल
मथुरा शाखा