सात जन्मो का बंधन है ये अटूट रिश्ता।
रस्मो, वचनो और प्रेम से बंधा अनोखा रिश्ता ।।
संस्कारो और विश्वास से जन्मा सुंदर रूप है पाया।
साथ साथ रहने की कसम से दो लोगो ने घर बसाया।।
आडंबर और दिखावे ने इसे बीगाङ डाला।
दहेज जैसी कुरीति ने खिलवाड ही कर डाला।।
प्रीवेडींग और लीव इन ने सब खत्म ही कर डाला।
अहम के कारण तो तलाक अपनी पहचान मे आ गया।।
युवाओ से कर रही है शादी बस एक ही पुकार।
मुझे बचाओ मुझे संभालो शादी की यही पुकार ।।
शादी रिश्ते से ही बना हुआ है ये समाज।
इसके साथ सब खङा हुआ हमारा संसार।।
गिरते हुये लोगो को युवा ही खङे कर सकते है।
साथ रहकर ही दोनो सब कुछ संवार सकते है।।
एक एक कदम साथ मिलाकर आगे बढ़ना होगा ।
एक दुसरे के साथ मिलकर अपना संसार बसाना होगा।।
अनामिका संजय अग्रवाल
खरसिया छत्तीसगढ़"