Saturday, April 23, 2022

ऋतू अग्रवाल, सृजन शाखा, कटक, उड़ीसा

 "*निर्मल धरा*

*‌‌बूंद बूंद से धारा बनती बूंद से ही बुझती प्यास* 

*अपनों के खातिर आज से ही जल बचाने का करना होगा हमें प्रयास*

*तपता सूरज तपती धरती और उजड़ी हरियाली यह करा रही एहसास* 

*पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ पेड़ से ही मिलती हम को ठंडक और जीवन को सांस*

*सबसे पहले करें दिमाग की सफाई और रखें अपने सफाई आसपास*

*सौर्य ऊर्जा के प्रति जागरूकता लाकर हर घर-घर में फैलाएं प्रकाश*"

ऋतू अग्रवाल, सृजन शाखा, कटक उड़ीसा 

No comments:

Post a Comment