Saturday, April 9, 2022

थम जा अब इन्सान

भरा आकाश और नव मंडल

बारूद और धुएं की बौछार है

सिसक रही मानवता

यह कैसा नरसंहार है

जहां थी तारों की लड़ियां

वहां बमों की भरमार है

कांप रहा नभ मंडल सारा

यह कैसा अत्याचार है

खोज ली बेटी ने जीवन बचाने की औषधि

पर क्यों पिता का युद्ध व्यापार है

बेबस बच्चे भूखे प्यासे

मां बाप भी लाचार हैं

क्यों चली गई इंसानियत

क्यों हैवानियत का ही राज है

बातें से कर सकते थे सुलह जहां

बेकार ही किए संहार है

नर कंकालों से भर गई धरती

पर फिर भी ना बदला उनका व्यवहार है


*पूनम सराफ*

*सचिव*

*रानीगंज शाखा*"


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