क्यों हमने खो दिया अपनी मानवता का सुंदर रंग,
लूट, खसोट, बेईमानी, का हमेशा मन में भरा अदम,
अच्छे विचारों की शरण लो, बुरे कर्म तुम छोड़ दो,
मानवता ही सद्धर्म हैं,ये नारा तुम बोल दो।
मोह माया को छोड़ कर थोड़ा दान पुण्य भी करके देख,
दान पुण्य, सत्कर्म, मदद ये तो मानवता के भूषण अनेक।
क्या इसी भाव से पैदा हुए थे,अपनी मां की कोख से ?
मानवता का गला घोट कर उनको ही हम दोष दे ।
मां के पालन पोषण का हमने दिया उनको ये परिणाम,
हम मानव ही इसके दोषी चलो फिर से करे एक निर्माण।
चलो फिर से अपने कर्मो को चमकाते है,
और मानवता का धर्म अपनाते है।
जय हिंद 🙏
जय अग्रसेन महाराज🙏
कविता खेतान भवानी पटना उड़ीसा
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