मुझे याद रखने के लिए
🙏मेरी आँखे उस आदमी को दे देना जिस ने कभी उगता हुआ सुरज न देखा हो
और न ही किसी बच्चो का चेहरा,य फिर नारी की ऑखो में अगाध प्रेम।
मेरा दिल उसे देना जिस के दिल ने उस को सिवाय पीड़ा के और कुछ न दिया हो।
मेरा खुन उस नौजवान को देना जिसे जख्मी हालत में उस की गाड़ी के मलबे में से
निकाला गया हो,ताकि उम्र पाकर वह अपने पोते पत्तियों को खेलता देख सके।
मेरे गुर्दे उसे देना जो हफ्ते दर हफ्ते मशीन के आधार पर ही जिन्दा रह रहा हो
मेरा मांस मेरे शरीर की हर हड्डी,हर रेशा,हर नाड़ी निकाल लो
लेकिन ऐसा तरीका खोज निकालो जिससे एक अपाहिज बच्चा चल पड़े
मेरे दिमाग का हर कोना खोज,लो जरूरत पड़े तो मेरी कोशिकाएं भी ले लो
और उन्हें पनपने दो ताकि किसी दिन कोई गूँगा बच्चा पक्षी की आवाज सुनकर
खुशी से चिल्ला उठे और कोई बच्ची सुन न पाती हो बच्ची खिड़की पर टपकती बर्षा की
बुॅदो की टप-टप सुन सके ।
मेरे बचे-खुचे शरीर को जला कर उस की राख हवा में बिखेर देना
ताकि उस राख से फूल खिल सके।
अगर तुम्हें दफनाना ही है तो दफना देना मेरी कमियाॅ मेरी कमजोरियां
और दुसरों के लिए मेरे दिल में बसी तमाम रंजिशें।
अगर कभी मुझे याद करना चाहो तो किसी जरूरतमंद को
अपने दो मीठे बोलों और मदद का सहारा दे देना ।
🌺मैने पुस्तक पढ़ा पड़ते समय शब्द होनहार थे बहुत कुछ सीखने को मिला
पुस्तक का नाम 🙏प्रभात का प्रकाश
बेटी को दे संस्कारो की पोटली
मां बेटी एक दूसरे की दुनिया होती है
मां एक निर्माता होती है
मां का आंगन पार करने पर मां दो शिक्षा जरूर दे बेटी को बेटी के गुण मत सीखाए
बेटी को बहु के गुण सीखाए धैर्य व धीरज न भुलना सीखाए।
रिशतो को समझदारी व गहराईयो से निभाना सीखाए
बेटी को सीखाए सास अच्छी सलाहकार व अच्छी दोस्त होती है।
बेटी फुल की तरह नाजुक होती है
बेटी जब एक दूसरी
दुनिया मे प्रवेश करती है
उस के जीवन मे नए लोग जैसे सास ससुर ननंद देवर पति और रिशते
इन नए रिशतो को प्यार से सींचने के लिए बेटी को काफी कंपरोमाइज करने होते है।
क्योकि रिशतो का पौधा मजबूत बन सके ।
बेटी जब ससुराल चली जाए मां को बाद मे उस पर छोड़ देना चाहिए ।
बेटी को अपनी जिन्दगी अपनी तरह जीने की सलाह दे
मां बेटी को ससुराल के बीच अपनी भूमिकाए न निभाए बेटी को
प्रेम की बोली स्वतंत्र निर्णय परिस्थितियो को समझे यही सीख दे
लडकी का ससुराल उस का अपना घर बन जाता है
नए रिशते ज्यादा करीब हो जाते है ससुराल का मान-सम्मान उस का अपना हो जाता है
लड़की वाले फोन समय देख कर अंदाजा लगा कर करे जरूरत पर लगाये
सास का समय पति का समय ध्यान पर रखते हुए करे ।
हमेशा यह याद रखना चाहिए लड़की के परिवार वालो को
कि लड़की का घर शिशे की तरह होता है छोटा स कंण दरारे डाल देती है यही दरारे
मुश्किले पैदा कर देती है इस लिए रिशते की डोर को मजबूत बनाने का प्रयास करे
एक बार रिशता मजबूती से जुड़जाए तो उसे कोई तोड नही सकता
रिशते पारदर्शी होने चाहिए
पहले जो हमारे पूर्वजो की परंपरा थी
काफी सुन्दर गरिमामय उच्च विचार सहनशील मान-सम्मान नरम गरम
इसलिए ही घर परिवार सुसज्जित ढंग से चलता था
संतोष अग्रवाल छत्तीसगढ 🙏
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