Saturday, June 18, 2022

मीनू शर्मा शिलांग, मेघालय

 "पापा तेरा घर

पापा तेरा घर अच्छा बहुत लगता है मुझे

बंधन यह प्यार का बांध के रखता है मुझे

मन करता है इस घर के किसी कोने में छुप जाऊं मैं 

पर मन की कौन सुनता है।

पापा तेरा घर अच्छा बहुत लगता है मुझे

याद आती है हर उस पल की जो पूरे दिल से जिया है 

मैंने यहां मन करता है रुक जाऊं कुछ और पल को

पर मन की कौन सुनता है।

पापा तेरा घर अच्छा बहुत लगता है मुझे

बच्ची हूं मैं भी यह तो बस तेरे आंगन में ही पता चलता है

वरना तो अब जिंदगी में बस जिम्मेदारियों का बोझ ही साथ चलता है।

पापा तेरा घर अच्छा बहुत लगता है मुझे

आंख नम है पर चलना तो पड़ता है

सफर लंबा है पर पहुंचना तो पड़ता है

जाने का मन नहीं है तेरे आंगन से पर 

वह एक और आंगन इंतजार भी तो करता है

मन की कौन सुनता है

पापा तेरा घर अच्छा बहुत लगता है मुझे।🙏🙏 

मीनू शर्मा

शिलांग, मेघालय

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