मेरी मां के लिए मेरी छोटी सी कविता
मां आपके लिए क्या-क्या लिखूं,
भाव बहुत हैं पर शब्द नहीं हैं..
क्या लिखूं,
प्रेम
मूरत आपकी मन में बसी,
पर
क्या लिखूं,
आप बस आप हो,
जो
धर्म है जो कर्म है जो मर्म है जो परम
है..
मां क्या लिखूं ,
मां तो
बस मां है,
जो
गुरु भी है सखा भी है, जो ईश्वर भी है मां...
क्या लिखूं ,
मां
क्या क्या लिखूं क्या क्या लिखूं...
स्वाती
अग्रवाल
नागपुर
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