Saturday, June 25, 2022

सुनीता डालमिया नागपुर

भारतीय  ससंकृति में 

माँ सदा पूजनीय है। माता पिता का आदर एक दिन,

नहीं सदा किया जाता है इसलिये तो कहतें हैं...

 

माँ से बढ़ कर कुछ नहीं, क्या पैसा क्या नाम ।

चरण छुए और हो गये, तीरथ  चारों धाम।

 

हम तो सोये थे चैन से पल पल देखे ख्वाब।

माँ कितना सोई जगी इसका नहीं हिसाब।

 

इनकी बाँहो में बसा, स्वर्ग सरीखा गाँव।

बाबू जी इक पेड़ हैं, अम्मा जिसकी छाँव।

 

सभी  माताओंको  समर्पित

 

सुनीता डालमिया

नागपुर

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