मां
तपती धूप में छांव का एहसास है मां ....
बच्चे के दिल की धड़कन को,
ख़ुद में महसूस करती है मां....
जिंदगी के सफर में कई रिश्ते बनते-बिगडते,
पर हर पल बाहें फैलाए मिलती है मां.....
समुद्र सा गहरा प्यार, मोती की तरह अनमोल,
हमारे
जीवन को संवारती है मां.....
काम पर बाहर हम जाते,
पर दरवाजे पर टकटकी लगाए बैठी रहती है मां.....
ख़ुद की परवाह न कर, हमेशा हमारी चिंता मे घिरी रहती है मां....
खरोंच मुझे लगे तो तड़प उठती है,
जल्दी ठीक हो उसके लिए सारा आसमान सर पर उठा
लेती है मां.....
निशब्द हूं उसकी ममता को पैमाने (शब्दों) में
बताने के लिए,
बस इतना कहूंगी,
इस धरती पर स्वयं भगवान का रूप है मां......
सोनिया अग्रवाल
नागपुर.
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