Saturday, May 28, 2022

उत्तरप्रदेश, प्रतापगढ़, संगीता खंडेलवाल

 मैं ख़ुशी कहाँ मिलती!!


एक दिन स्वपन में आई खुशी!!

बोली मैं महलों में नहीं

मंदिर-में नहीं

रामायण, गीता मैं नहीं

महंगे कपड़ो , मोटर-गाड़ी सब लगते मुझे सजावटी

मैं खुशी!!

हर दिल में मैं मिलती

बस मुझे चाहने के लिए बनों सरल व संतोषी

फिर देखो

मैं तो दिन-रात पास में ही रहती

मैं हूं थककर आते पति की चाय की चुस्की

मैं खुशी

बच्चों की मुस्कुराहट में मैं मिलती

अतिथियो के सत्कार से मैं मिलती

बड़ों का आदर,छोटों को प्यार से मैं मिलती

पडोसियों के सुख-दुख में शामिल होने से मिलती..

मैं खुशी

दया, धर्म, मान सम्मान 

मीठे बोल से मैं चहकती

मैं सच्चे दोस्तों मैं महकती 

स्वच्छ व स्वस्थ वातावरण को मैंलुभाती

हरियाली देख नाचती बन मोरनी..

जो अपने दायित्वों में दिखाते ईमानदारी

मैं रहती वहींं जो है मेहनती, सरल, सहज 

‘मैं खुशी बाल मन मैं मिलती !!!!


उत्तरप्रदेश, प्रतापगढ़, संगीता खंडेलवाल


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