Saturday, May 28, 2022

आसाम, देरगांव शाखा, मनोरमा जैन

रक्त दान


मानव हो, मानवता का चरम रूप धर ।

तू रक्तदान कर, तू रक्तदान कर।


रक्तदान से बड़ा, ना कोई दान है 

रक्तदाता से बड़ा, ना कोई महान है

अपने लहु से बचाता जो औरों की जान है

पुण्यात्मा और पूज्य वह इन्सान है ।

इन्सान हो, इंसानियत का चढ़ जा शिखर 

तू रक्तदान कर, तू रक्तदान कर।


रक्त्दानीयो के जब चलेंगे काफिले

रक्त अल्पता मरीजों की थमेगी मुश्किलें 

दुर्घटना ग्रस्त हज़ारों नव जीवन पाएंगे

तेरा रक्त पा कर फिर से जी जाएंगे ।

मरते हुए में रक्त से फिर से जान भर

तू रक्तदान कर, तू रक्तदान कर।


गरीब या अमीर हो सभी यहाँ समान ।

ज़रुरतमंद कोई हो अपना या पराया

रक्तदानीयों के लिए अपना सारा जहां

रक्तदान से नहीं कोई भी नुक्सान

आगे बढ़ संशय ना कर बना रहे निडर

तू रक्तदान कर, तू रक्तदान कर।


कुछ सरफिरें देखो ले रहें निर्दोषों की जान

रक्तदान ललकार तेरी बचालो घायलों के प्राण 

सीमा पर लड़ते प्रहरी देश के खातिर जो क़ुर्बान  

वहां भी रक्तदान यज्ञ से बचेंगे वीरों के प्राण ।

जीवन में कई दान किए अब ये महादान कर

तू रक्तदान कर, तू रक्तदान कर ।


आसाम, देरगांव शाखा, मनोरमा जैन

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