Saturday, May 28, 2022

उड़ीसा, ब्रह्म पूर, शांति मुदरा

 संस्कार और संस्कृति

आजकल की बहु बेटीया भी गजब ढा रही है , जिस घर में जाकर देखो सब जॉब पर जा रही है .।


सुबह नौ बजते ही वो काम पर निकल जाती है , अपने परिवार लिए भी खाना कहा बना पाती है ।


बच्चे कब स्कुल को जाते है, कब लौंटकर घर को आते है पता तक ना होता है इस बात का ।

बस पैसा कमाना ही उनका मकसद है, परवाह न रहती दिन और रात का  ।


अभी बच्चे तो पल रहे है आया के भरोसे, फिर बड़े होकर चले जाएगे कमाने प्रदेश ।

जिन बच्चो को माँ _बाप का प्यार ही नशीब  नही उन बच्चो को क्या पता होगा, 


संस्कारो और संस्कृति के बारे में विशेष ।

कि, कौन है दादा कौन है दादी कौन है नाना नानी ।

आने वाली हमारी नयी पिढी तो किताबो में ही पढा करेगी संस्कार और संस्कृति की कहानी।


माना कि पैसा जीवन की जरुरत है,पर संस्कार है जीवन का आधार।

अपने बच्चो को संस्कारी बनाओ देकर के परिवार का प्यार ।


उड़ीसा, ब्रह्म पूर, शांति मुदरा 

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