*मानवता*
धर्म के नाम पर जान लेने को है तैयार,
यह भगवान और खुदा से है कैसा प्यार?
मानव बड़ा ही बेशर्म हो गया है,
मानवता से बड़ा अब धर्म हो गया है।
धर्म ही मानव को मानवता का पाठ पढ़ाता है,
स्वार्थ, लालच और विचार हमसे गलत करता है।
धर्म को जाने, कर्म को जाने,
ईश्वर कण कण में हैं पहचाने।
मानवता ही बड़ा धर्म है, आओ मानवता को पहचाने।
मानवता से होगा जग उज्ज्वल,
मानवता में विश्वास रखो।
निर्माण करें हम प्रेम फूलो का,
मानवता को मानव से जोड़ें
मानवता ही बड़ा धर्म है,
आओ दिल से दिल जोड़ें।।
बिहार, बेगुसराय, रेखा खेमका
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