Saturday, May 28, 2022

बिहार, जोगबनी, मीना गोयल

 पता है मुझे...

तेरे बिन मैं कुछ नही हूँ

पर मैं सबकुछ होना चाहती  हूँ।।

मैं बिना वजह  हंसती हूं... मैं बिना  समझे बोलती हूं...

इसलिए कि  मैं खुश रहना चाहती  हूँ  ।।

बच्चों सी मासूमियत... मुस्कुराहट.. अपने खोए  बचपन को बचाकर रखना चाहती हूँ ।।

पता है मुझे  ....

मैं अच्छा  नृत्य नही करती हूँ

पर मैं आनंदित हूँ 

बिना ताल  मटकना चाहती हूँ।।

पता है मुझे...मैं सुंदर भी  नही हूँ।

लेकिन फिर भी मैं खुद को 

 संवारना चाहती हूँ।।

पता है अभी... मैं अच्छा नही लिखती  पर मेरा भी मन है... सबकुछ बताना चाहती हूँ।।

मेरे न रहने पर भी जो बाते जिंदा रहे..वो सब भी मैं  लिखना चाहती हूँ।।

किसी वजह से तो सब हंसते हैं...

पर मै बिना वजह  मुस्कुराना चाहती हूँ।।

*मैं कुछ नही हूँ पर सबकुछ होना चाहती हूँ*।।

स्वरचित 

बिहार, जोगबनी, मीना गोयल 

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