Thursday, June 23, 2022

मनीषा लाठी सोनकच्छ मध्यप्रदेश

 आज पितृ दिवस के अवसर पर सभी बहनें अपनी स्वरचित रचनाएं पढ़ रही हैं, लेकिन मेरे मन की व्यथा कुछ अलग है। आज से 20 वर्ष पूर्व मैंने अपने डैडी को एक कार एक्सीडेंट में खो दिया था । मेरी रचना उनके अभाव में मेरे जीवन में जो रिक्तता आई है, उस पर आधारित है ।


आपकी कमी खलती है मुझे,

 यह खालीपन बहुत सताता है ।

बस यूं ही  आपकी यादें दिल में समेटे,

 यह वक्त गुजरता जाता है।।




समझ में आता है क्या फर्ज है ??

 और क्या जिम्मेदारी है??

 खुद से ज्यादा आप अपने,

 परिवार की खुशियां प्यारी है।


 दौड़ रहे हैं हम सब यहां,

 पकड़ने को जिंदगी की रफ्तार ।

अपना आज हम जी नहीं पाते ,

और करते कल की तैयारी हैं। 


आपके दूर जाने का मुझे,

 हर पल एहसास होता है।

 आपको खो दिया है, 

नहीं विश्वास होता है ।


हर बात में आपका साथ,

 अब याद बहुत आता है।

 हर बीता लम्हा अब तो बस,

 आंखों में आंसू लाता है।।


आपकी सीख और समझाईश का मूल मंत्र ,

जीने का सहारा देता जाता है ।

आपके बिना जीना भी क्या जीना है??

 बस यह वक्त गुजरता जाता है ।

बस यह वक्त गुजरता जाता है।।


 मनीषा लाठी 

 सोनकच्छ 

मध्यप्रदेश

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