Thursday, June 23, 2022

संध्या प्रकाश पेशकार देवास मध्यप्रदेश

 बहू---बहू----!!


बहू तुम लक्ष्मी बनकर आना बदले में सम्मान व प्यार है पाना। 

बहू तुम--- लक्ष्मी--- बनकर आना


अपनें से बड़ों को तुम देना सम्मान, 

छोटों को स्नेह व प्यार लुटाना। 

बहू तुम.... लक्ष्मी... बनकर आना...!

अपनी करूणा व प्यार से, घर को स्वर्ग बनाना, 

कभी तुम करूणा की देवी बन जाना । 

बहू तुम.... लक्ष्मी....बनकर आना .. ...

बदले में.. सम्मान है पाना


समय कभी विपरीत आ जाए 

तो कभी ना घबराना, 

यदि जरुरत पड़े तो तुम दुर्गा, काली भी बन जाना ।

बहू तुम.. लक्ष्मी.... बनकर आना


कहते हैं बेटी माँ जाई है, 

बहू पराये घर से आई है, बेटी को तो इक दिन है जाना, 

उसे दुनियाँ की रित है निभाना । 

बहू ही है अपनी, 

बेटी तो है पराई ... 

यह बात तुम्हें समझ क्यूँ न आई ।

बहू तुम..... लक्ष्मी---बनकर आना।


बेटे कहते हैं माता पिता मेरे है, 

मै करूँगा उनकी सेवा, 

मगर बेटे कहते ही रह जाते है, 

कर जाती है बहू मात पिता की सेवा । 

बहु तुम... लक्ष्मी... .बनकर आना ,

बदले में .. सम्मान.....  है पाना


बेटियाँ हमारा मान है तो बेटा बहू भी तो हमारा अभिमान है, 

जहाँ होती है बहु मुस्कुराती, वहीं सारी खुशियाँ दौड़ी चली आती ।

बहू तुम.... लक्ष्मी.. बनकर आना      

बहु तुम सदा मुस्कुराना, कभी ना रुठ जाना, 

यदि तुम रूठ गई तो, 

हम ना जी पाएंगे, 

तुम्हें हम प्यार के सिवा क्या दे पाएंगे । 

बहू तुम...... लक्ष्मी ..बनकर आना, 

बदले में.सम्मान.. ....है पाना


हम तुम्हारे है, तुम हमारी हो, यही सोच को है अपनाना .. 

कभी यह बात भूल न जाना बहु तुम... लक्ष्मी.  ...बनकर आना..


तुमसे ही है हमारा सपना, तुम उसे अपनाना, 

उसे पुरा कर जाना । 

बहू तुम.... लक्ष्मी....बनकर आना


तुम जो मुस्कुराओगी, 

बगियाँ सारी खिल जाएगी, घर में बहार आएगी, 

इन बहारों में तुम घुलमिल जाना, 

अपनें रंगों को बिखराना ।।


बहू तुम लक्ष्मी बनकर आना, बदले में सम्मान व प्यार है पाना ,

बहू तुम घर को स्वर्ग है बनाना ।


(मेरी ओर से सभी बहूओं और बेटियों को समर्पित )


संध्या प्रकाश पेशकार

देवास

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