“माँ”
माँ के लिए कुछ भी कहना
कहाँ सेशुरु करूँ
कहाँ पर ख़त्म करूँ
अनादि से शुरु हो कर
अनन्त तक चलने वाला
“माँ
“शब्द तो किसी शब्दों की मोहताज नहीं
माँ तो ईश्वर का भेजा वह तोहफ़ा है
जो हमें हमारे वजूद की पहचान देता है
जो हमें हमारे ख़ुद के होने का अहसास कराता है
“माँ”
माँ के लिए कुछ भी कहना
कहाँ सेशुरु करूँ
कहाँ पर ख़त्म करूँ
अनादि से शुरु हो कर
अनन्त तक चलने वाला
“माँ
“शब्द तो किसी शब्दों की मोहताज नहीं
माँ तो ईश्वर का भेजा वह तोहफ़ा है
जो हमें हमारे वजूद की पहचान देता है
जो हमें हमारे ख़ुद के होने का अहसास कराता है
आभा बोहरा
अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन
शाखा - नागपुर
आभा बोहरा
नागपुर
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