Saturday, June 25, 2022

चंचल तापड़िया

मां

मां शब्द है सबसे ऊंचा,

   इसके जैसा नहीं कोई दूजा,

 कितना प्यारा था वह पल ,

    सुहाना लगता था बालों को सहलाना।

 

ढेरों आशीष  देकर तेरा मुस्कुराना,

        नामुमकिन है उन क्षणों को भूल पाना।

         मुश्किलों में, सुख दुख में राह बताना ।

 

अपने आंचल की छांव  फैलाना। 

 याद आता है वह जमाना

   केसे अदा करुं मां तेरा शुकराना।

 

                चंचल तापड़िया🙏

No comments:

Post a Comment