तपोवन की पावन भूमि सी माँ
सहृदय सुशीला है बड़ी प्यारी है माँ
कोख मैं अपनी देती तुम पनाह
रहमत से तुम्हारी देखते है जहाँ
आग़ोश मैं तुम्हारे ममता का अहसास
दिल मैं रहता सदा प्यार का वास
स्पर्श से तुम्हारे मिलता सुकून
चेहरे पे रहती मीठी मुस्कान
व्यक्तित्व मैं है आत्मसम्मान
यही है तुम्हारी अपनी पहचान
प्रार्थना मैं तुम्हारी संतान का सुख
दुआ मैं करती ख़ुशी की कामना
तुम ही ने दिया हमें खुला आसमान
कोई ना तुमसा
तुम तो हो माँ
देवी प्रतिमा सद्रशय तुम्हारी है छवि
नाज़ है हमको हम तुम्हारी है कृति
नतमस्तक है हम तुम्हारे समक्ष
प्रतिपल करते है तुमको नमन ।
-सुनीता दमानी
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