Thursday, June 23, 2022

सुधा गुप्ता, लखनऊ, उतरप्रदेश

 छूट गया 

जो छूट गया सो छूट गया

कच्चे धागे थे टूट गऐ

फिर जीवन पथ पर मुड़ना क्या

तू जिसकी याद मैं रोया है

उसने भी तुझे क्या खोया है

फिर नीले आसमान मैं

 बनजारों सा उड़ना क्या

जीवन पथ पर यू मुड़ना क्या

अंत हुआ फिर जुड़ना क्या..


सुधा गुप्ता

 लखनऊ

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