[9:11 am, 18/06/2022] Vandana Choudhry: बढ़े चलो
खुशी बाँटो हरे पत्तों की तरह,
आगे बढ़ो बहते पानी की तरह,
आसमान में उड़ो बादलों की तरह,
अडिग रहो ऊँचे पहाड़ों की तरह।।
पत्तों की सरसराहट,पानी की कलकलाहट,
बारिश की झनझनाहट,वीराने की सनसनाहट,
प्रकृति की है ये कैसी प्रकृति?
याद दिलाए हमें हमारी आकृति।।
निकलो बादलों से सूरज की तरह,
खिलो कलियों से फूलों की तरह,
निकलो पहाड़ों से रास्तों की तरह,
रहो पानी में कमल की तरह।।
प्रकृति ने दिए हमें इतने प्रकार,
जो याद दिलाए हमें हमारे विकार,
सीख लें, अनन्या कुछ प्रकृति से,
मिल जाए हमें हमारा आकार।।
डौली अग्रवाल 'अनन्या'
[9:11 am, 18/06/2022] Vandana Choudhry: नारी
कण-कण में बसा तेरे जीवन,
मधुर कथा श्रद्धा व मन,
प्राण प्रदान करते द्वि थन,
किलकारी भरते बाल सुमन।।
पंकज,पवन,पुरंदर,अनंत,
वसुधा,शैल,सलिल,मयंक,
प्रकृति प्रिये सलिल भर लोचन,
चमक उठी सृष्टि बन कुंदन।।
भानु सी आभा बिखेरती त्रण,
निर्मल शीतलता फैलाती क्षण,
अनन्या सी ज्योत चमकती,
शक्ति की शिक्षा मिले हर कदम।।
प्रवीण वाणी की वेणी बन,
प्रधान प्रिया बनी अभिनंदन,
प्रसन्नता लिए वन उपवन,
प्रणति वंदन करें देवगण।।
डौली अग्रवाल अनन्या शिलोंग मेघालय
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