Thursday, June 23, 2022

रुचिका हरभजनका, महानंदा नगर, मध्यप्रदेश

 "हिंदी का गौरव"

हिंदुस्तानी होकर हिंदी भाषा को नमन करते हुए मेरे कथन....

जब हिन्दुस्तानी अपनी मातृभाषा को दिल की आवाज बनाता है ,

माँ सरस्वती का वास उसकी वाणी में हो जाता है ,

उसका हर कथन "तथास्तु"बनकर शंखनाद करता है ,

तब उसका हर शब्द एक कवच बन जाता है ,

जब हिंदी को 'भाषा साम्रागी 'का ताज मिल जाता है  ,

तब गौरवान्वित होकर मेरा हर कथन मेरी मातृभाषा को शीश झुकाता है ।

भारत माँ की जय का नारा हो या लहराये जब तिरंगा प्यारा ,

 जो शब्द जहन में गूंजे वो जयकार हमारी मातृभाषा है ,

जब सरहद पर सिपाही देशभक्ति का गीत गुनगुनाएं और वतन के लिए गोली तक झेल जाए ,

उस गोली को पार करता जयहिंद शब्द हिंदी का गौरव बन जब इठलाता है , 

तब मेरा हर कथन मेरी मातृभाषा को शीश झुकाता है ,

अपने गीतों से गीतकार जब प्यार के दिये जलाता है , 

कवि अपनी कलम से देखो कैसे तीर चलाता है ,

जब लेखक अपनी लेखनी से वतन की तस्वीर बदल देता है ,

 हिंदी भाषा में लिखे वक्तव्य " जियो और जीने दो "जब मुस्कुराते हैं ,

तब फिर से मेरे कथन अपनी मातृभाषा को शीश झुकाते हैं ।

जब जश्न कोई हम मनाते हैं ,

वतन से आतंकवाद को हटाते हैं ,

भ्रष्टाचारी का दानव जब दम तोड़ता है ,

भारत का अभिमन्यु जब घर लौटता है ,

काश्मीर फिर हमारा गहना बन जाता है , 

तब वंदेमातरम का 'जयनाद' हिंदी में गुनगुनाता है ,

और फिर से मेरा हर शब्द अपनी मातृभाषा को शीश झुकाता है ,

चाँद पर जीवन की खोज करते चंद्रयान को चाँद जब गले लगाता है ,

तब भी हिंदुस्तान "कोशिश करने वालों की हार नही होती" शब्दों के साथ मुस्कुराता है ,

विभिन्न भाषी जनमानस के मुख से भारतवर्ष महान का नारा देखो कैसे गूंज जाता है ,

तब फिर से मेरा हर कथन अपनी मातृभाषा के सम्मान में सर झुकाता है । 

    

रुचिका  हरभजनका

महानंदा नगर  मध्यप्रदेश

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