Thursday, June 23, 2022

ममता माहेश्वरी, गुना शाखा, मध्य प्रदेश

 जबसे मैंने आँखें खोली माँ तूने ही मुझे सवारा सजाया 

तेरे स्नेह  के आँचल ने हर ख़तरे से मुझे बचाया 

जीवन के हर ज़हर को पल्लू से छानकर अमृत बनाया 

कहने को तो माँ हो मेरी लेकिन पहला दोस्त तुम्हें बनाया 

रिश्तों की हर गठरी  को सहेजना तुमने सिखलाया 

सही है ये, ग़लत क्या है ? भेद तुमने बतलाया 

पढ़ाई में बनी मेरी टीचर कभी पापा का कुर्ता पहन डराया 

जब भी उदास हो गयी मैं तुमने ही मुझे बहलाया 

2 क़दम पीछे रहकर मेरे कंधों को ढाढ़स बँधाया 

संबल बनी ढाल बनी जब जब मैंने ख़ुद को अकेला पाया 

खेल खेल में जीवन का हर पाठ मुझे पढ़ाया 

हिम्मत से लड़ सकूँ दुनियाँ से इस क़ाबिल मुझे बनाया


ममता माहेश्वरी 

गुना शाखा मध्य प्रदेश

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