*नारी*
*नारी हूं मैं नारी हूं*, सबकी मैं आभारी हूं।
घर सम्भालू तो संसारी हूं, जो व्यापार संभालू तो व्यापारी हूं।
कुदरत की सर्वश्रेष्ठ कलाकारी हूं, हर बात की रखती जानकारी हूं।
मैं हर घर में खुशियों की किलकारी हूं।
*नारी मैं हूं मैं नारी हूं* ।
हर गम को भुला दूं मैं हँसती हँसती, मुझसे ही घर में खुशियां बस्ती।
कभी अबला तो कभी आदिशक्ति, ऐसी है हमारी कुछ अभिव्यक्ति।
*नारी हूं मैं नारी हूं*, सबकी मैं आभारी हूं।
*धन्यवाद*
झारखंड, हजारीबाग, श्वेता सेठी
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