औरत
इस युग में कृष्ण का
इन्तजार मत कर द्रौपदी
घोर कलयुग की है 21वीं सदी
आसुं से नहीं अंगारों से
अपनी आंखें भरनी है ।
कृष्ण के भेष में
दुस्शासन घात लगाएं हैं
जिनसे आशा है हमको
वह ईमान बेच कर बैठे हैं।
शस्त्र उठालो द्रौपदी
नहीं और कुछ कर सकती
मेहंदी से नहीं
तलवारो से श्रृंगार करो
तुमको ही देने होगे
अपराधियो को सजा
इस युग में जीना हैं
तो स्वालम्बी बनो ।
झारखंड, खाटरस गढ़, प्रियंका चौधरी
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