मेरी सहेलियां
कितनी प्यारी होती है सहेलियां, कितनी अनोखी होती है सहेलियां ।
हर रोज सहेलियों से मिलने का बहाना ढूंढा करते थे,
कहा गए वो दिन ...आज भी हम अपनी सहेलियों को ढूंढा करते है।
मां बहन दादी चाची से जो बात बताने में कतराते थे।
कितनी आसानी से यह बात अपनी सहेलियों से कह पाते थे।
बचपन के सहेलियां आज भी याद आती है...
जब कभी आंखें बंद करूं तो वही बातें याद आती है।
कब एक एक करके बिछड़ते चले गए,
पत्नी भाभी चाची आंटी न जाने क्या क्या कहलाने लग गए।
बचपन कब बीत गया सहेलियों वाला शब्द भूलते चले गए ।
आज भी सहेलियों के लिए दिल का एक कोना खाली है...
कितनी याद आती है जब एक साथ हम खेला करते थे।
कहा गया वो बचपन जो हर वक्त सहेलियों को ढूंढा करते थे।
कितनी प्यारी होती है सहेलियां , कितनी अच्छी होती है यह सहेलियां।।।
सारी सहेलियों को समर्पित।
झारखंड, जमशेदपुर, बबिता भावसिंहका
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