Saturday, May 28, 2022

झारखंड, चाकुलिया, पुष्पा रूंगटा

 ना काटो बैलों को मानव ,

कि धरती टूट जाएगी !

ये नन्दी वाहन है शिव का ,

कि भगवान रुठ जाएंगे !

ना काटो बैलों को मानव !!


समर्पण है स्वभाव इनका ,

परिश्रम की मिसाल है ये !

ये संगी साथी मानव का ,

ये जीने का भी सहारा है !

ना काटो बैलों को मानव !!


है गोवंश धरती पर वरदान ,

किया ऋषियों ने इनका गान !

है गोबर गौमूत्र सर्वोत्तम ,

कि  पूजन योग्य माना है !

ना काटो बैलों को मानव !!


जूड़ा इनसे हमारा कर्म ,

जूड़ा इनसे हमारा धर्म !

तो जोड़ें क्यूं ना अपना मन ,

ये गौवंश "कल" हमारा है !

ना काटो बैलों को मानव !!


 झारखंड, चाकुलिया, पुष्पा   रूंगटा

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