विषय - मुखौटा
आज हर इंसान ने पहना है मुखौटा
कभी गम का मुखौटा
कभी झूठी खुशी का मुखौटा
आज सामने जो मित्र हैं कल वो कोन सा पहनेगा मुखौटा
अभी चुनावी मैदान में सभी नेता पहनेगे मुखौटा
अक्सर रिश्तेदार भी हमारी मदद के लिए पहन लेते है मुखौटा
आज हम पहचान भी नहीं सकते है उन लोगों को जिन्होंने पहने है मुखौटा
गुजारिश है मेरी सभी से
अपने चेहरे से कब हटाओगे ये मुखौटा,
बहुत देख लिया सब को अब तो इंसानियत का पहन लो मुखौटा
पानी से जीवन
पानी से बने सब का जीवन
सुंदर सपन सलोना ।
पेड़ पक्षी या हो मानव
पानी को व्यर्थ ना बहाना ।
पानी की कीमत समझो
एक एक बूंद है सोना ।
जितनी जरूरत उतना ले लो
इसको व्यर्थ ना खोना ।
कोई मालामाल है
कोई बूंद-बूंद को तरसे।
एक कुआं इस गांव में
वह भी गर्मी से सूखा।
नल की लाइन ना आई
त्राहि-त्राहि मची गांव में ।
वोट मांगने आए नेता
जीत के वादे को भूला ।
पानी की कीमत के संग में
इंसानों की कीमत समझो ।
तुम तो भर भर टंकी फेंको
वह तो मांगे बस एक लोटा ।
पानी से बने सबका जीवन
सुंदर सपन सलोना ।
पेड़ पक्षी या हो मानव
पानी को व्यर्थ ना बहाना।
मध्यप्रदेश, खरगोन, कीर्ति जैन अनुराग जैन
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