Saturday, May 28, 2022

महाराष्ट्र, नागपुर, माया शर्मा

 🌹🙏 **माँ** 🙏🌹


जिसके एक नयन में ममता,

एक नयन में करुणा है, 

जिसका हृदय प्यार का सागर ,

प्रभु की वह रचना मां है। 

 

कन  कन में ईश्वर रहता है, 

ये तो हर कोई कहता है।

लेकिन ना किसी ने देखा है,

इसलिए एक अंदेशा है           

 है सर्वत्र व्याप्त ईश्वर,

हर शास्त्र यही तो कहता है।

शायद मां के रूप में ईश्वर हर घर घर में रहता है। 


माता  के तन से ही हमको इस  मानव  तन का दान मिला।

वो देवी है मां जिससे मानव जीवन का वरदान मिला।

मां से सब है,

मां ही रब है,

राग रंग सबमें मां है।

इस नीरस जग में माता,

सरस सलोना झरना है।


 रग रग  मां के वात्सल्य से     सदा प्रफल्लित रहता है, 

शिरा शिरा में प्रेम उसी का रक्त रूप में बहता है। 

मां का त्याग अनोखा है,

मां का हर रूप अनूठा  है।

इस रिश्ते के सच के आगे,

हर रिश्ता लगता बोना है।


इस स्वप्निल संसार में,

मां ही सबसे सुंदर सपना है।

ईश्वर की रचनाओं में 

मां सबसे सुंदर रचना है।


सरस,शहद झरना है

और मां का हर त्याग अनोखा है ,

मां का हर रूप सलौना है।

 संसार कल्पना ईश्वर की, 

मां सबसे श्रेष्ठ कल्पना है।

मां के उपकार अनगिनत है,

 मां जैसा ना कोई दूजा।


मां की सेवा प्रभु की सेवा 

मां की पूजा प्रभु की पूजा।

मां के जैसी बस मां ही है,

मां का सा ना कोई दूजा। 


एहसान चुकाना कब  संभव ? एहसानों को स्वीकार करे।

इस प्रीत  प्रसविनी जननी की सच्चे मन से जयकार करें।



महाराष्ट्र, नागपुर, माया शर्मा

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