Tuesday, April 19, 2022

राष्ट्र चेतना

(भारत माता अपना दर्द बयां करते हुए)


आक्रमण जो हुआ,सीना छलनी हुआ।

सब तार-तार हो गया,वार ऐसा हुआ।।

मेरी अस्मत लुटी,मेरी किस्मत रूठी।

जोर कुछ ना चला, घात ऐसा हुआ।।


चतुरों ने चतुराई से,ऐसी चालें चली।

फूट डाली,कमान हाथों में थाम ली।।

बंटवारा होने लगा,वजूद मिटने लगा।

चोट धर्म पर पड़ी,नींव हिलने लगी।।


मेरी चुनर लाल हुई थी,जिन बेटों के खून से।

जंजीरों से आजाद हुई,उन बेटों के जुनून से।।

मुक्त हुई थी बंधन से , फिर भी मैं बैचेन रही।

घर में छुपे गद्दारों से,अब भी मुझको चैन नहीं।।


रोज- रोज सरहद पर,मेरे लाल जान गंवाते हैं।

पर मजहब के नाम ,लोग लूट-मार मचाते हैं।।

कर लो दिल से सम्मान,सरहद के जवानों का।

देश के सच्चे सपूत,वीर-शहीद-नौजवानों का।।


स्वरचित,

"रोशनी सेक्सरिया"

बेलपहाड़ शाखा

ओडिसा

8327795554

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