Saturday, May 28, 2022

झारखंड, साहिबगंज, रेनू तमाखुवाला

संस्कार


 इंसान अपने जीवन में पैसे के महत्व को इतना बढ़ा लिया है कि बाकी चीजे उसके लिये महत्वहीन हो चुकी हैं. अच्छे संस्कार से बच्चे का चरित्र निर्माण होता है. इससे बच्चा जीवन में सफलता पाता है. बुढ़ापे में माता-पिता की सेवा करता है. दान-पूण्य, जरूरत मंदों की मदत करता है. संस्कार अच्छे होने से मनुष्य के विचार सकारात्मक होते है. जीवन में हार, दुःख, कठिनाई होने के बावजूद भी आप निराश नही होते है. आप वही आचरण करें, जैसा आप अपने बच्चे से चाहते है.


सन्तान न हो तो पूरे जीवन में सिर्फ एक दुःख होता है,

संतान संस्कारविहीन हो तो पूरा जीवन ही दुःख होता है.


जिनके संस्कार अच्छे होते है,

वो किसी का दिल नही दुखाते है,

चाहे प्यार में हो या मजाक में हो.


जो बच्चों को सिर्फ पैसा कमाना सिखाते है,

वही माँ-बाप बुढ़ापा अकेलेपन में बिताते है. 


झारखंड, साहिबगंज, रेनू तमाखुवाला 

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