Saturday, April 30, 2022

सुनीता गोयल, अकलतरा, छतीसगढ़

*मां आखिर मैं तेरी ही अंश हूं*

पहली धड़कन  मेरी धडकी थी तेरे ही भीतर,

आंखें खुली जब सबसे पहले  तेरा ही चेहरा दिखा,

जिंदगी का हर लम्हा जीना तुझसे ही सीखा।

*मां आखिर मैं तेरी ही अंश हूं*


सुर मिला मुझे तुझसे ही,

मेरी अभिलाषाओं को रंगों से भरा तुमने ही,

अपना निवाला छोड़ , मेरा भंडार भरी। 

बेटी होने पर हमेशा नाज करी।

**मां आखिर मैं तेरी ही अंश हूं*


नासमझ थी मैं इतनी खुद का भी मुझे इतना ध्यान नहीं था,

तू ही बस वो एक थी, जिसको मेरी भूख प्यास का ध्यान था,

विषम परिस्थितियों में भी कभी नहीं जताया

पाला पोसा और आगे बढ़ाया।

*मां आखिर मैं तेरी हीअंश हूं*


अपने लिए कभी तुझे दुर्गा, कभी काली बनते देखा।

बड़ी बड़ी परेशानियों में भी हंसते हुए आगे बढ़ते देखा।।

*मां आखिर मैं तेरी ही अंश हूं*


अब और नहीं घिसने देना चाहती तेरे ही मुलायम हाथों को,

चाहती हूं पूरा करना,

तेरे सपनों में देखी हर बातों को।

*मां आखिर मैं तेरी ही अंश हूं*


तूने ही तो मुझे हर गमों में हंसना सिखाया,

किसी भी जुल्म के आगे, कभी न झुकना सिखाया,

सितम की उम्र छोटी है हमेशा ये बताया।

*मां आखिर मैं तेरी ही अंश हूं*


मुझे ऊंचाइयों पर सारी दुनिया देख रहीं है आज,

मेरी इस तरक्की पर तुझे है नाज।

और मां तेरे इस अंदाज पर मुझे है नाज।

*मां आखिर में तेरी ही अंश हूं*


लूं कितने भी जन्म पर तेरा ना कर्ज उतार पाऊंगी।

लड़ जाऊंगी, मर जाऊंगी पर हर जन्म में तेरी ही बेटी कहलाना चाहूंगी।।

*मां आखिर मैं तेरी ही अंश हूं*


8 मई मातृ दिवस पर एक स्वरचित कविता जिसमें मैंने अपने बेटी के भाव को बताने की कोशिश की है🙏

🌹❤️❤️🌹

मातृ शक्ति को नमन

 ❤️ मातृ दिवस पर एक स्वरचित कविता ❤️

मां आखिर मैं तेरी ही अंश हूं

 पहली धड़कन  मेरी धडकी थी तेरे ही भीतर ,

आंखें खुली जब सबसे पहले  तेरा ही चेहरा दिखा,

जिंदगी का हर लम्हा जीना तुझसे ही सीखा.

      मांआखिर मैं तेरी ही अंश हूं

  सुर मिला मुझे तुझसे ही,

 मेरी अभिलाषाओं को रंगों से भरा तुमने ही,

अपना निवाला छोड़ , मेरा भंडार भरी। बेटी होने पर हमेशा नाज करी।

मां आखिर मैं तेरी हीअंश हूं

अपने लिए कभी तुझे दुर्गा, कभी काली बनते देखा।

बड़ी बड़ी परेशानियों में भी हंसते हुए आगे बढ़ते देखा।।

मां आखिर मैं तेरी ही अंश हूं

अब और नहीं घिसने देना चाहती तेरे ही मुलायम हाथों को,

चाहती हूं पूरा करना,

तेरे सपनों में देखी हर बातों को.

मांआखिर मैं तेरी ही अंश हूं

तूने ही तो मुझे हर गमों में हंसना सिखाया।

किसी भी जुल्म के आगे, कभी न झुकना सिखाया

सितम की उम्र छोटी है हमेशा ये बताया।

,,मां आखिर मैं तेरी ही अंश हूं

मुझे ऊंचाइयों पर सारी दुनिया देख रहीं है आज,

मेरी इस तरक्की पर तुझे है नाज।

और मां तेरे इस अंदाज पर मुझे है नाज।

मांआखिर में तेरी ही अंश हूं

लूं कितने भी जन्म पर तेरा ना कर्ज उतार पाऊंगी।

लड़़ जाऊंगी, मर जाऊंगी पर हर जन्म में तेरी ही बेटी कहलाना चाहूंगी।।

मां आखिर मैं तेरी ही अंश हूं


- सुनीता गोयल अकलतरा

छतीसगढ़ 

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