Wednesday, April 27, 2022

उषा खेमका, दक्षिण कोलकाता, पश्चिम बंगाल

 "*बुचा नरसंहार पर उद्गार*: 


क्या होगा जब उठी संवेदना थोड़ी सी देर  के लिए 

धूल की मोटी  सी परत पर एक धूमिल सी रेख

कुछ करने का जज्बा नहीं, चारों ओर सिर्फ निराशा

सिर्फ बातों से पेट नहीं भरता, ना ही पौंछ जाते आँसू

इसलिए रचनाओं पर रचनाएं सब बेकार है, 

चारों तरफ जहां क्रूरता और अनैतिकता का समंदर है, 

वहां सिर्फ जीभ हिलाने से शर्म शेर नहीं बन सकती. 


-उषा खेमका, दक्षिण  कोलकाता पश्चिम बंगाल 9339664194

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